अरहर दाल के फायदे

अरहर दाल के फायदे

अरहर दाल के फायदे

प्रकृति – गर्म और रुक्ष। जिन्हें इसकी प्रकृति के कारण हानि हो, वे इसकी दाल को घी से छौंककर खायें, फिर किसी प्रकार की हानि नहीं होगी।

अण्डवृद्धि (Hydrocele) – यदि बच्चे की अण्डवृद्धि (फोता लटक जाए) तों अरहर की दाल भिगोकर उसी पानी में पीसकर गर्म करके लेप करें।

पसीना – अरहर की दाल, नमक और सोंठ मिलाकर छौंक कर मालिश करने से पसीना आना बन्द हो जाता है। हड़फूटन मिटती है। सर्दी, कँपकपीं लगना ठीक हो जाती है। सन्निपात की अवस्था में पसीना आने पर भी यह प्रयोग कर सकते हैं।

गैस – अरहर पेट में गैस पैदा करती है।

मुँह में छाले – इसकी दाल छिलकों सहित पानी में भिगोकर उस पानी से कुल्ले करने पर छाले ठीक हो जाते हैं। यह गर्मी का प्रभाव दूर करती है।

भाँग का नशा – 31 ग्राम अरहर की दाल को पानी में उबालकर या पानी में भिगोकर उसका पानी पिलाने से भाँग का नशा उतर जाता है।

खुजली – अरहर की दाल को दही के साथ पीसकर लगाने से खुजली में लाभ होता है।

फोड़ा – यदि फोड़े को पकाना अनिवार्य हो तो पानी में अरहर की दाल पीसकर नमक मिलाकर गर्म करके फोड़े पर बाँधने से फोड़ा जल्दी पककर फूट जाता है।

बालों के चकत्ते उड़ना (Alopecia) – चकत्तों को खुरदरे कपड़े से रगड़कर अरहर की दाल पीसकर नित्य तीन बार लेप करें, दूसरे दिन सरसों का तेल लगाकर धूप में बैठें। चार घण्टे बाद पुन: लेप करें। इस तरह कुछ दिन करने से बाल आ जाते हैं।

नकसीर – अरहर की दाल के तीन दाने एक चम्मच पानी में भिगो दें। दो घण्टे बाद इन्हें पीसकर पानी में घोलकर नाक में टपका दें। नकसीर बन्द हो जायेगी।

फोलेिक अम्ल

फोलिक अम्ल चना, राजमा और सेम में पाया जाता है।

बाँझपन पुरुषों में – फोलिक अम्ल गर्भवती स्त्रियों के शिशुओं को जन्मजात विकृतियों से बचाता है और पुरुषों को बाँझपन के दोषों से बचाता है। फोलिक अम्ल की कमी से पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है और शुक्राणुओं की गुणवत्ता भी खराब होती है। फोलिक अम्ल की पूर्ति के लिए चना, राजमा और सेम नियमित खायें।