इसोफैगियल कैंसर और निमोनिया

इसोफैगियल कैंसर और निमोनिया

इसोफैगियल कैंसर और निमोनिया

गंभीर एसिडिटी का समय रहते उपचार न कराना इसोफैगियल कैंसर का कारण बन सकता है। इसके अलावा एसिडिटी में ली जाने वाली दवाओं से पेट में एसिड की कमी हो जाती है, जो बैक्टीरिया उत्पत्ति के लिए आदर्श स्थिति है। इससे फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया की आशंका बढ़ जाती है।

सही करवट सोएं

फिलाडेल्फिया में हुए एक शोध के अनुसार जिन लोगों को रात में सोने के समय एसिडिटी की समस्या है अगर वह दायीं करवट से सोएं तो उन्हें आराम मिलेगा। सीधे व कमर के बल सोने पर एसिड वापस फिसलकर इसोफैगस में आ जाता है। सिर के नीचे थोड़ा ऊंचा तकिया रख सोने पर एसिड को इसोफैगस में जाने से रोक सकते हैं।

युवाओं में बढ़ी सीने में जलन की समस्या

लोग हमेशा छाती में दर्द को हार्ट अटैक से जोड़ते हैं, पर कई बार यह दर्द फूड पाइप की वजह से भी होता है। इसे नॉन कार्डिएक चेस्ट पेन कहते हैं। इसमें कार्डिएक चेस्ट पेन के साथ दिखाई देने वाले लक्षण जैसे पसीना आना, सांस फूलना नहीं होते हैं। वैसे दोनों में अंतर करना कठिन होता है, अत: तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि सीने की जलन जीवनशैली से जुड़ी समस्या है। आप अगर सही समय पर नहीं खाएंगे, ज्यादा मसालेदार और तलाभुना खाएंगे, शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहेंगे तो आसानी से इसके शिकार हो जाएंगे। यही कारण है कि आज युवा भी इसके तेजी से शिकार हो रहे हैं। उनके लिए जरूरी है कि वे नियत समय पर पोषक भोजन करें, जंक फूड या अधिक तले से दूर रहें। खाना खाते समय टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर से दूर रहें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। तनाव न पालें। अगर यह सब करने के बाद भी एसिडिटी की समस्या रहे तो एंडोस्कोपी करवाएं।

एसिडिटी से जुड़े मिथक

एसिडिटी के बारे में कईं गलत धारणाएं हैं जो इसके उचित उपचार में बाधा बनती हैं।

दूध एसिडिटी में आराम पहुंचाता है

आम धारणा है कि दूध एसिड को निष्प्रभावी कर आराम पहुंचाता है। जबकि सच यह है कि दूध में पाया जाने वाला कैल्शियम पेट में एसिड के स्राव को उत्प्रेरित कर देता है और समस्या को और बढ़ा देता है। इसके अलावा दूध को पचाना भी मुश्किल होता है और इसके लिए पेट को अधिक मात्र में एसिड स्नवित करना पड़ता है। पीना है तो ठंडा दूध पिएं।

मसालेदार भोजन से हमेशा परहेज

यह एसिडिटी से जुड़ा हुआ एक और मिथ है। अगर आपको एसिडिटी है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपको हमेशा फीका और बिना मसालेदार भोजन करना होगा। सिर्फ आप मसाले का प्रयोग थोड़ा कम करें। इसी तरह कैफीनयुक्त चीजों का सेवन भी कम मात्र में करें। पोषक भोजन और पेय पदार्थो के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

एंटासिड दवाएं पूरी तरह सुरक्षित

बिना सोचे-समझे कोई भी दवाई न लें। अधिकतर मामलों में इन दवाइयों का प्रभाव थोड़े समय तक ही रहता है और लक्षण वापस लौटकर आ सकते हैं। इन दवाइयों के गंभीर साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, जिनमें निमोनिया और हड्डियों से संबंधित समस्याएं भी हैं। जो तुरंत तो दिखाई नहीं देते लेकिन लंबे समय तक इनके सेवन से यह नजर आने लगते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण पर भी प्रभाव डालता है।

अधिक एसिड के स्नव से होती है एसिडिटी

एसिडिटी से पीड़ित लोगों के पेट में भी एसिड की मात्र सामान्य लोगों जितनी ही रहती है। समस्या तब शुरू होती है जब एसिड पेट में रहने के बजाए इसोफैगस में चला जाता है। लेकिन फिर भी डॉक्टर पेट के एसिड को कम करने वाली दवाइयां देते हैं क्योंकि ऐसी कोई दवाई नहीं है जो एसिड रिफलक्स के कारकों को दूर करने में राहत दे सकें।

गंभीर एसिडिटी का समय रहते उपचार न कराना इसोफैगियल कैंसर का कारण बन सकता है। इसके अलावा एसिडिटी में ली जाने वाली दवाओं से पेट में एसिड की कमी हो जाती है, जो बैक्टीरिया उत्पत्ति के लिए आदर्श स्थिति है। इससे फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया की आशंका बढ़ जाती है।