कान में दर्द के उपचार

कान में दर्द के उपचार

कान में दर्द के उपचार

बारिश के मौसम में कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं से हमें दो चार होना पड़ता है जो बड़ी ही तकलीफ देती हैं ,ऐसी ही एक सामान्य सी जान पडऩे वाली समस्या है कान दर्द जिसके कारण हमारी दिनचर्या पूरी तरह से प्रभावित होती है।
आज हम आपको कुछ ऐसे प्राकृतिक एवं घरेलू ,सामान्य से जान पडने वाले परन्तु उपयोगी उपचार की जानकारी देंगे जिसका प्रयोग आपको निश्चित ही लाभ देगा आइए सबसे पहले जानें कर्ण वेदना क्यूँ उत्पन्न होती है ?

कान में दर्द के लिए रामबाण आयुर्वेदिक नुस्खे बता रहे हैं डॉ.नवीन जोशी एम.डी.आयुर्वेद। डॉ.नवीन जोशी विगत कई वर्षों से अपने लेखन क माध्यम से लोगों को आयुर्वेद,योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं।

कर्णवेदना कान के हिस्से में उत्पन्न होने वाले संक्रमण के कारण उत्पन्न होती है। सामन्यतया कान का मध्य भाग वायु से भरा होता है,परन्तु जाड़े के समय इसमें फ्लुयुड्स एवं म्युकस जमा हो जाते हैं,जिसमें जीवाणुओं के संक्रमण होने की प्रबल संभावना होती है, जिससे कर्णवेदना उत्पन्न होती है, लम्बे समय तक शोर आदि के कारण कान में सीटी बजने या गूंजने की सी आवाज उत्पन्न होती है ऐसी सभी स्थितियों में त्वरित चिकित्सा परामर्श आवश्यक होता है।

कान दर्द के कुछ सामान्य कारण क्या हैं…..

  • कर्णनलिका में अवरोध उत्पन्न होना।

-दाँतों में उत्पन्न घाव के कारण पैदा होने वाला दर्द।

  • ईयर ड्रम को पहुँची क्षति।

-साईनोसायटीस।

  • ईयर वैक्स (कान की गन्दगी )।
  • जोड़ों का दर्द (गठिया )।

-कान में पहुँची चोट।

-टोंसिलायटीस।

-फेरेन्जायटीस।

कान दर्द में उपयोगी घरेलू उपाय –

  • एक कटोरे में उबाला हुआ पानी लें,इसमें यूकेलीप्टस के तेल की कुछ बूँदें और एक चम्मच विक्स मिला दें अब एक तौलिए से अपने सिर को अच्छी तरह से ढक लें और नाक से साँस के माध्यम से वाष्प को जितना हो सके अन्दर खींचें,यह अन्दर के दबाव को कम कर कर्णस्राव को बाहर निकालने में मदद करता है।

-चार या पांच चम्मच नमक को सौस्पेन तबतक धीमी आंच पर भुनें जबतक की यह भूरे रंग का न हो जाए ,अब इस गर्म किये हुए भुने नमक को एक साफ कपडे पर अच्छी तरह से लपेट लें और इसे कान के प्रभावित हिस्से में दो से पांच मिनट तक रखें आप सूजन और दर्द में आराम महसूस करेंगे।

  • अपने भोजन में अधिक से अधिक विटामिन -सी युक्त पदार्थों जैसे अमरुद ,नींबू ,संतरे ,पपीते अदि फलों का प्रयोग करें ये कर्णवेदना को कम करने में उपयोगी होते हैं। सफेद सिरके (वेनेगर ) एवं रबिंग एल्कोहल के मिश्रण को दो बूँद ड्रापर की मदद कान में डालकर कान को कुछ समय(लगभग एक घंटे ) तक रूई से बंद कर देने और इसी क्रम को बार-बार दुहराने से संक्रमण ठीक होता है।

-अदरख का रस निकालकर दो बूँद कान में टपका देने से भी कर्णवेदना एवं सूजन में लाभ मिलता है।

  • लहसुन की दो कलीयों को अच्छी तरह से पीस लें अब इसमें एक चुटकी नमक मिलाकर वूलेन कपडे से बनायी गयी पुल्टीस को दर्द वाले हिस्से के ऊपर रखें इससे दर्द में आराम मिलेगा।- लहसुन की दो कलीयों को अच्छी तरह से पीस लें अब इसमें एक चुटकी नमक मिलाकर वूलेन कपडे से बनायी गयी पुल्टीस को दर्द वाले हिस्से के ऊपर रखें इससे दर्द में आराम मिलेगा।

-प्याज का रस निकाल लें,अब रुई के फाये या किसी वूलेन कपडे के टुकडे को इस रस में डुबायें अब इसे कान के उपर निचोड़ दें ,इससे कान में उत्पन्न सूजन,दर्द ,लालिमा एवं संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है।

ये तो हमने कुछ छोटे और आसान उपाय आपको सुझाए जो कान के दर्द से आपको राहत देंगे ,लेकिन तकलीफ अधिक होने पर आपको चिकित्सक से अवश्य ही परामर्श लेना चाहिए।

  • दो या तीन बूँद सरसों का तेल संक्रमण युक्त कर्णवेदना में लाभ देता है। एक साफ सुथरे तौलिये को गर्म पानी में डुबायें और इसे संक्रमण युक्त कान के हिस्से के ऊपर दबाते हुए लगभग बीस मिनट तक रखें यह कर्णवेदना से तुरंत आराम देता है।
  • तुलसी की ताज़ी पतियों को निचोड़कर दो बूँद कान में टपकाना कान दर्द से राहत देता है।