जीभ के रोग

जीभ के रोग

जीभ के रोग

के किनारी लाल गई हो तो एण्टि-टा, आर्स, बैप्टि, बेला, कैन्थ, चेलि, इचिने, कैलि-बा, लैक-कै, लैके, मर्क-आयोड-फ्ले, मर्क, नाइट्रि-ऐ, पोडो, रस-टॉक्स और सल्फ आदि औषधियों में से कोई भी औषधि प्रयोग करने से लाभ मिलता है।
जीभ के किनारी लाल हो और जीभ के बीच का भाग सफेद हो तो उपचार के लिए बेलाडोना या रस-टॉक्स औषधि का प्रयोग करना अच्छा होता है।
जीभ के बीच का भाग लाल या धारीदार दिखाई देने पर ऐण्टि-टा,, क्रोटेल, आर्स, कॉस्टि या विरेट्र-वी औषधि का प्रयोग करने से जीभ का रंग सामान्य हो जाता है तथा निशान भी आदि दूर होते हैं।
यदि जीभ लाल हो और उस पर कटी या छिली हुई जैसे निशान पड़े हो तो एलियम-सी औषधि का सेवन करना चाहिए।लाल जीभ होने के साथ उसका कट-फट जाने जैसे लक्षणों में इन औषधियों का प्रयोग करें – आर्स, बेला, कैलि-बा, ऐण्टिम-टा, अर्जेट-ना, लाइको, मेजे तथा नक्स-मौ, टेरिबि आदि।
जीभ गहरी लाल रंग के हो गए हों तो एरम, कैन्थ, आर्स या टैरैक्स औषधि आदि का प्रयोग करने से जीभ की लाल समाप्त होती है।
जीभ लाल चमकदार, चिकनी हो जाने के लक्षणों में क्रौटेल, कैलि-बा, एपिस, फॉस, पाइरो, रस-टॉक्स, कैन्थ, लैके, नाइट्रि-ऐ या टेरिबि औषधियों में से किसी एक औषधि का प्रयोग करके रोग को ठीक किया जा सकता है।
जीभ पर लाल रंग के धब्बे या दाग हो गए हों और जीभ पर किसी चीज की स्पर्श के कारण तेज दर्द होता हो तो ऐसे में रोगी को अर्जेन्ट-ना, आर्स, फाइटो, रस-टॉक्स, साइक्ले, मर्क-आयो-फ्ले या सल्फ औषधि का उपयोग करना हितकारी होता है।
जीभ का अगला भाग लाल हो तो अर्जेन्ट-ना, आर्स, साइक्ले, मर्क-आयो-फ्ले, फाइटो, रस-टॉ या सल्फ आदि औषधि का प्रयोग करना चाहिए।जीभ लाल हो, जीभ तर रहता हो तथा जीभ के बीच के भाग में दरारें पड़ गए हों तो नाइट्रि-ऐ औषधि का उपयोग करें।
स्ट्रोबेरी की तरह जीभ का रंग हो तो उपचार के लिए बेलाडेना औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
जीभ लाल रंग का हो तो उपचार के लिए डैफने, लोबेल-इन या रस-टॉक्स आदि का सेवन करें।
जीभ पर सफेद लेप चढ़ा हो और जीभ चिपचिपी लेई की तरह हो गई हो तो इन औषधियों का प्रयोग करें- बैप्टि, बिस्म, ऐन्टिम-क्रू, ऐन्टिम-टा, ब्रायो, चेलि, मर्क, पल्स, साइक्ले, हाइडै तथा सीपिया आदि।
इन औषधियों में से कोई भी औषधि प्रयोग करना लाभकारी होता है।
जीभ पीला, गंदे रंग का होने के साथ ही उस पर अधिक लेप चढ़ा हो तो रोगी को उपचार के लिए एस्क्यू, कार्बो-वे, बैप्टि, ब्रायो, कैमो, चेलिडो, कैलि-बा, मर्क, सिनकोना, हाइड्रै, नैट्रम-स या पल्स आदि औषधियों में से किसी एक औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
जीभ के बीच भाग में पीले रंग के चकत्ते दाग हो तो बेप्टि या फाइटो औषधि का सेवन करना चाहिए।

जीभ के रोगों को ठीक करने के लिए औषधियों के प्रयोग के साथ ही अन्य उपचार :-

जीभ रोगग्रस्त होने पर रोगी को भरपूर्ण संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए।हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, मांस-मछली, दूध, पनीर आदि का सेवन करना जीभ के रोग से पीड़ित रोगी के लिए लाभदायक होता है।रोगी को मुंह को साफ रखना चाहिए तथा दांतों को भी साफ रखना चाहिए और खाना खाने के बाद मुंह को अवश्य साफ करें एवं जीभ को भी साफ करें।अधिक गर्म पदार्थ का सेवन न करें क्योंकि इससे जीभ जल जाती है।अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।धूम्रपान न करें क्योंकि इससे भी जीभ के कई प्रकार के रोग होते हैं।

जीभ की सूजन :-

जीभ की सूजन की अवस्था में जीभ का रंग लाल, जीभ फूल हुई और दर्द तथा जलन होती है, जीभ मुंह के बाहर निकल आती है और मुंह से अधिक लार स्राव होता है, इस रोग के कारण खाना खाने, बोलने और सांस लेने में कष्ट होता है। सर्दी लगने, कमजोरी आने, जीभ में घाव होने, जीभ छिल जाने तथा चोट लगने के कारण यह रोग होता है। अधिक पारा का सेवन करने के कारण भी जीभ प्रदाहित हो जाती है।

विभिन्न औषधियों से उपचार:

  1. एलूमेन
  2. फॉस्फोरस
  3. एपिस
  4. आर्सेनिक
  5. ऑरम-मेट
  6. बेनजोइक-ऐसिड
  7. बेलाडोना
  8. रैननक्युलस-स्केलेरेटस
  9. ऐरम-ट्रिफाइलम
  10. रस-टॉक्स
  11. मर्क-विवस
  12. ऐकोनाइट