जोड़ों का दर्द से कंही परेशान हैं

जोड़ों का दर्द से कंही परेशान हैं

जोड़ों का दर्द से कंही परेशान हैं

ऑस्टिओ ऑर्थराइटिस जोड़ों से संबंधित बीमारी है, जिसे जोडमें का दर्द भी कहा जाता है। यह गठिया का सबसे आम प्रकार है। गठिया एक सामान्य शब्द है, जिसका मतलब होता है जोड़ों में सूजन। एक समय के बाद हड्डियों में गठिया रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है। लेकिन सर्दी के मौसम में यह समस्या काफी बढ़ जाती है। गठिया रोग से पीडित लोगों की हमेशा यही शिकायत होती है कि सर्दियों के दौरान उनकी परेशानी बढ़ जाती है। आमतौर पर वे इसका अंदाजा भी नहीं लगा पाते कि इसके लिए उनकी जीवनशैली भी जिम्मेदार है।
इसमें क्या होता है

जब हड्डियां पूरी तरह घिस जाती हैं तो जोड़ों की हड्डियों को बचाने की कोई भी गुंजाइश बाकी नहीं रहती है। यह समस्या एक हड्डी से दूसरी हड्डी में बढ़ती जाती है। इससे कुछ समय बाद दर्द शुरू हो जाता है जिसे ऑस्टियो ऑर्थराइटिस कहते हैं।
आपको भी कर सकता है परेशान

आमतौर पर बुजुर्गों एवं 60 साल से अधिक आयु के लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा होता है। लेकिन इन दिनों शहरी जीवनशैली में 40 वर्ष से कम आयु के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। वे अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों जैसे मोटापा, थॉयराइड, मधुमेह आदि से पीडित लोगों को ऑस्टियो आर्थराइटिस होने की आशंका काफी अधिक होती है। महिलाओं को घुटनों में ऑस्टियो आर्थराइटिस होना एक आम बात है।
क्या है कारण

यह कोई आनुवांशिक बीमारी नहीं है। अगर आपका वजन बहुत ज्यादा है तो समस्या अधिक बढ़ जाती है। मधुमेह एवं हाइपोथैरोडिज्म के मरीजों को यह रोग होना एक आम बात है। कुछ अन्य समस्या भी गठिया रोग का कारण बन सकती है। लंबे समय तक हड्डियों से जुड़ी ये बीमारी मानसिक आघात का भी कारण बन सकती है।
लक्षण को पहचानें

इस बीमारी में जोड़ों में दर्द, जोड़ों में सूजन, चलने में तकलीफ, जमीन पर बैठने में परेशानी होती है तो इसे हल्के में न लें।
जरूरी जांच कराएं

इस रोग के लिए खून की जांच नहीं होती है। इस कारण डॉक्टर जरूरी जांच के दौरान मरीज के डॉक्टरी इतिहास पर पूरा ध्यान देते हैं, क्योंकि इससे काफी सहायत मिलती है। गठिया रोग की अधिकता को जानने के लिए वजन संबंधी एक्स रे भी किया जा सकता है।
उपचार है आसान

जोड़ों को आराम देना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बारीक पट्टियों या प्लास्टर के द्वारा आराम दिया जा सकता है। दर्द में सिकाई करना भी एक अच्छा उपचार है। एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि स्वयं ही दर्द निवारक दवाओं का सेवन न करें। सूजन और दर्द कम हो जाए तो आप व्यायाम भी कर सकते हैं। इस तरह की समस्याओं में फिजियोथेरेपी बहुत ही मददगार साबित होती है।
दिनचर्या को सुधारें

इस तकलीफ से बचने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव जरूरी है। अपने आहार पर ध्यान दें। संतुलित आहार लें। प्रतिदिन उपयुक्त व्यायाम करें। मधुमेह और थॉयराइड जैसी बीमारियों को नियंत्रित रखें। सर्दियों में गठिया रोग से बचने के लिए पर्याप्त कपड़े पहनें।
घर में हैं अनेक उपाय

जोड़ों में दर्द होता है तो आपको सक्रिय रहने की आवश्यक्ता है। सर्दियों में व्यायाम करने के लिए अक्सर बाहर जाना नहीं हो पाता। इसलिए घर में ही व्यायाम करना सही रहता है।

गर्म कपड़े पहनें

सर्दी में अपना खास ख्याल रखें, गर्म कपड़े पहनें। ऊनी कपड़ों से अपने पैरों और घुटनों को खासतौर से ढक कर रखें।

जरूरी सप्लीमेंट लें

विटामिन डी की कमी के कारण भी गठिया रोग की समस्या बढ़ सकती है। सर्दी के दौरान ज्यादा ठंड रहने और धूप न मिलने के कारण आपको विटामिन डी पूरी तरह से नहीं मिल पाता। इसलिए सर्दियों में डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी सप्लीमेंट लें। दूध, मछली आदि को भी अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।