दिल का दर्द पहचाने इसके लक्षण

दिल का दर्द पहचाने इसके लक्षण

दिल का दर्द पहचाने इसके लक्षण


कोरोनरी हार्ट डिजीज किसी भी उम्र में हो सकती है। समय रहते इलाज करा लिया जाए तो आप दिल के दौरे जैसे खतरे से बच सकते हैं। बता रहे हैं मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर कन्सल्टेंट (कार्डियोलॉजी) डॉं नरेश गोयल
कोरोनरी धमनी रोग यानी सीएडी एक तरह का हृदय रोग है, जिसमें हमारे हृदय की धमनियों के अंदर प्लेक नाम के एक मोम जैसे पदार्थ का निर्माण होने लगता है, जिससे हमारी धमनियां सिकुड़ जाती हैं और हमारे हृदय तक ऑक्सीजन युक्त खून का प्रवाह घट जाता है। यही प्लेक जब हमारे हृदय की धमनियों के आधे हिस्से में फैल जाता है तो हमारी छाती में दर्द होने लगता है और रोजमर्रा के काम में हमें परेशानी होने लगती है। इसके अलावा छाती में कसाव और ऐंठन भी महसूस होने लगती है, जिसे एनजाइन कहते हैं। कंधे, बांह, गर्दन, दांत के जबड़े, पीठ और पेट के ऊपरी भाग में भी यह दर्द हो सकता है।

सीएडी की वजह से ही दिल का दौरा पड़ता है। किसी व्यक्ति को दिल का दौरा तब पड़ता है, जब उसके प्लेक टूटने लगते हैं और धमनियों पर खून के थक्के जमने लगते हैं, जिससे हृदय की धमनियों में खून का प्रवाह बहुत कम समय में ही अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में अगर खून का प्रवाह तुरंत पहले जैसा नहीं हुआ, तो हृदय की मांसपेशियां 20 मिनटों के बाद ही मृत होने लगती हैं। ऐसे में व्यक्ति का तुरंत इलाज करवाना चाहिए, नहीं तो सेहत से जुड़ी परेशानियों के अलावा मृत्यु तक का खतरा हो सकता है। सांस की कमी, मिचली आना, उल्टी करना, चक्कर आना आदि दिल के दौरे के लक्षण हैं।
इन वजहों से सीएडी में विकास होता है

धूम्रपान, बीमारी का पारिवारिक इतिहास, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सुस्त जीवनशैली, व्यायाम में कमी, तनाव, हाईपरलीपिडेमिया (खून में लीपिड की मात्रा का बढ़ना)।
समय रहते करा लें इलाज

सही समय पर हृदय से जुड़ी इस परेशानी का इलाज न कराया जाए तो हृदय काम करना बंद कर सकता है। इससे हृदय की पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है, तो फेफड़ों में खून का जमाव होने लगता है और व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इसके अलावा हृदय की गति अचानक से रुक जाना भी इसकी एक बड़ी समस्या है। कई बार मरीज को यह आभास नहीं हो पाता कि उन्हें हदय से जुड़ी कोई परेशानी है। इसलिए शुरुआत में ही बीमारी की पहचान हो जाए तो इस बीमारी का इलाज करना संभव होगा। फिर भी अगर बीमारी की पहचान नहीं हो पा रही हो और दवाइयों से भी कोई फायदा नहीं हो पा रहा हो, तो कार्डिएक रिसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी की मदद ली जा सकती है। वहीं दिल के दौरे पड़ने पर खून के थक्कों को हटाने के साथ एंजियोप्लास्टी (अवरुद्ध धमनियों को खोलने की एक तकनीक) एक सुरक्षित तरीका है।
अपनाएं ये उपाय

अपनी जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव कर आप इस बीमारी से बच सकते हैं, जिसमें वजन को नियंत्रित रखने के साथ निम्न बातों पर अमल करने की सलाह दी जाती है।
स्वस्थ डाइट अपनाएं

एक स्वस्थ डाइट एक स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा होती है। एक दिन की डाइट में 25-35 प्रतिशत से ज्यादा कैलोरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही स्वस्थ डाइट में घुलनशील फाइबर होता है। फाइबर पाचन तंत्र को कोलेस्ट्रॉल सोखने से रोकता है। ओटमील, जई का चोकर, सेब, केले, संतरे, नाशपाती, आलूबुखारे, काबुली चने, राजमा, दाल, लोबिया में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा खाने में नमक संतुलित मात्रा में होनी चाहिए, साथ ही खाने में ऊपर से नमक कभी न डालें। नियमित तौर पर अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों को दिन में दो बार से ज्यादा ड्रिंक नहीं लेनी चाहिए।
शारीरिक तौर पर रहें सक्रिय

नियमित रूप से शारीरिक श्रम हृदय से जुड़ी कई बीमारियों (जैसे उच्च रक्तचाप, अत्यधिक वजन) के खतरे को कम कर देता है। यही नहीं, यह मधुमेह के खतरे को भी कम करता है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए आप रोज तेज-तेज चलें, सीढियां चढ़ें या कोई खेल खेलें। जॉगिंग, स्विमिंग, बाइकिंग, वॉकिंग जैसे एरोबिक व्यायाम भी आपके हृदय को स्वस्थ बनाते हैं। एक हफ्ते में 150 मिनट यानी करीब ढाई घंटे के हल्के व्यायाम या 75 मिनट यानी सवा घंटे के कड़े व्यायाम की सलाह दी जाती है।
धूम्रपान से बचें

धूम्रपान दिल का दौरा पड़ने का एक बहुत बड़ा कारण है। आंकड़े बताते हैं कि 65 साल के कम उम्र के एक तिहाई लोगों में क्रोनिक हर्ट डिजीज का मुख्य कारण धूम्रपान होता है। वहीं जिन लोगों ने समय रहते ही धूम्रपान छोड़ा है, उनमें कोरोनरी धमनी रोग से उत्पन्न मृत्यु का खतरा करीब आधा कम हो गया। यह भी देखा गया है कि जो लोग घूम्रपान नहीं करते, उनका इलाज धूम्रपान करने वाले लोगों से ज्यादा प्रभावी तरीके से हो पाता है।
तनाव से रहें दूर

रिसर्च बताते हैं कि मानसिक तनाव भी दिल का दौरा पड़ने का एक अहम कारण है। कई बार तनाव दूर करने के लिए लोग ड्रिंक, धूम्रपान या ओवरईटिंग का सहारा लेने लगते हैं, जिससे हृदय की सेहत पर


नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए तनाव से दूर रहें और हृदय को स्वस्थ रखें।