मूंग दाल के फायदे

मूंग दाल के फायदे

मूंग दाल के फायदे

ज्वर – ज्वर में मूंग की दाल खाना उत्तम पथ्य है। यह छिलके सहित काम में लेनी चाहिए। ज्वर होने पर मूंग की दाल में सूखे आँवले डालकर पकायें और नित्य सुबह-शाम दो बार खायें। इससे ज्वर ठीक होगा, दस्त साफ आएगा। मूंग अाँखों के लिए हितकारी है।

शक्तिवर्धक – (1) लम्बे समय तक बीमार रहने के बाद ठीक होने पर नित्य मूंग की दाल खाने से शक्ति बढ़ती है। (2) दुर्बल रोगियों को जिन्हें अन्न देना मना हो, साबुत मूंग पानी में उबालकर पानी छान लें और इस पानी में नमक, कालीमिर्च स्वाद के अनुसार डालकर हींग से छौंक लें और थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिलायें, यह स्वादिष्ट, सुपाच्य और निर्दोष अन्न का पेय है जो शक्ति भी देता है। (3) मूंग के लड्डू खाने से शक्ति बढ़ती है। (4) सर्दी के मौसम में पाचनशक्ति बढ़ जाती है। अत: पौष्टिक भोजन लाभप्रद है। बिना छिलके वाली मूंग की दाल 500 ग्राम, उड़द की दाल 250 ग्राम 3 घंटे पानी में भिगोकर पीस लें तथा 750 ग्राम घी में धीमी अाँच में इसे भून लें। अच्छी तरह भूनने पर इसे ठण्डा होने के लिए रख दें। पचास ग्राम शतावरी चूर्ण और 50 ग्राम असगन्ध चूर्ण तथा 750 ग्राम बूरा (शर्करा से बना हुआ) अच्छी तरह मिलाकर पचास-पचास ग्राम के लड्डू बना कर रख लें। प्रतिदिन प्रात: दो लड्डू खायें।

लाभ – इसके प्रयोग से बल, वर्ण (रूप), वीर्य तथा रक्त की वृद्धि होकर मनुष्य के मुख पर कान्ति तथा ओज की वृद्धि होती है। निरन्तर प्रयोग से मुख की झाँई, धब्बे, चर्म की सलवटें नष्ट हो जाती हैं। अाँखों को ज्योति बढ़ती है तथा संपूर्ण शरीर एवं इन्द्रियाँ शक्तिशाली हो जाती हैं। यह सभी के लिए उपयोगी है। इसके सेवनकाल में किसी प्रकार का परहेज नहीं है।

पसीना – मूंग सेंककर पीस लें। इनको उबटन की तरह मलने से अधिक पसीना आना बन्द हो जाता है।

रतौंधी – साबुत मूंग उबालकर शक्कर मिलाकर नित्य खाने से रतौंधी ठीक हो जाती है।

जलना – मूंग पानी में पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करें।

दाद, खाज – छिलके सहित मूंग की दाल इतने पानी में भिगोएँ कि वह उस पानी को सोख ले। दो घण्टे भीगने के बाद उसे पीसकर दाद, खाज पर लगाने से लाभ होता है।

कब्ज़ – चावल-मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज़ दूर होती है। दो भाग मूंग की दाल और एक भाग चावल की खिचड़ी बनायें। नमक डाल सकते हैं। फिर घी डालकर खायें। इससे कब्ज़ दूर होगा और दस्त साफ़ आएगा।

छाले – मूंग को छिलके सहित दाल रात को पानी में भिगो दें। प्रात: छानकर पानी से कुल्ले करें तथा दाल चबा-चबाकर खायें। छाले ठीक हो जायेंगे। दाल पर स्वाद के लिए जो मसाले चाहें डाल सकते हैं। भोजन में छिलकों सहित मूंग की दाल छौंककर खायें।

फ्लू – मूंग, मसूर और मोठ की दाल पकाकर इसका पानी पियें।

पीलिया – मूंग की दाल के पानी में मिश्री मिलाकर पियें।

दस्त – नये और लम्बे समय से हो रहे दस्तों में 100 ग्राम मूंग तवे पर भूनकर पीसकर रख लें। इसकी दो चम्मच एक कप दही में घोलकर नित्य खाने से दस्तों में लाभ होता है।

मलेरिया – मूंग और मोठ की दाल का पानी पियें।