संकुचित नसे

संकुचित नसे

संकुचित नसे

कम्प्रेस्ड नर्व या पिंच्ड नर्व शब्द दबे या सिकुड़े नर्व को सूचित करता है। अगर यह दब जाए तो न्यूरॉल्जिकल संदेशों को भेजने में असमर्थ हो जाता है। नर्व के दबने से सेंसरी, मोटर या ऑटोनोमिक नर्व प्रभावित हो सकता है। सिंगल कंप्रेस्ड नर्व का सबसे आम उदाहरण है-पांव या हाथ का सो जाना।
कारण

नसों का दबना, सिकुड़ना या खिंच जाना 
हर्निएटेड डिस्क या बोन स्पर्स, जो स्पाइनल अर्थाराइटिस के दौरान बनते हैं 
गर्भावस्था, चोट, रिपिटिटिव मोशन या जोड़ो के रोग 

साइटिका होने के पीछे लंबर क्षेत्र या पिछले हिस्से में कंप्रेस्ड नर्व की समस्या हो सकती है। कलाई में कम्प्रेस्ड नर्व कार्पल टनेल सिंड्रोम के कारण हो सकता है।
लक्षण

संवेदनहीनता 
पिन या सूई चुभने या जलन की अनुभूति 
प्रभावित क्षेत्र से बाहर की ओर दर्द फैलना 

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन सी नर्व प्रभावित है, क्योंकि प्रत्येक नर्व शरीर के अलग-अलग हिस्सों से संदेश लाते और ले जाते हैं। उदाहरण के लिए

गले में कंप्रेस्ड नर्व से गरदन में दर्द या कड़ापन हो जाता है, और लक्षण बांहो की ओर बढता हुआ प्रतीत होता है। 
पीठ के निचले हिस्से में कंप्रेस्ड नर्व की शिकायत जिससे पीठ में दर्द या कड़ापन हो सकता है औऱ लक्षण पैरों की ओर बढता है। 

जांच औऱ रोग की पहचान

डॉक्टर गरदन या पीठ में कंप्रेस्ड नर्व की पहचान के लिए बांह या पैर में किस जगह दर्द होता है, किस प्रकार का दर्द होता है, संवेदनहीनता, झुनझुनी, कमजोरी औऱ दूसरे लक्षणों के बारे में प्रश्न करेगा। शारीरिक जांच औऱ चिकित्सकीय इतिहास के आधार पर डॉक्टर अन्य किसी जांच की सलाह दे सकता है, जैसे-

एक्स-रे: इससे रीढ की हड्डी में चोट या अर्थाराइटिस का पता लगाया जा सकता है। 
सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैनः लक्षणों की गंभीरता और अवधि को देखते हुए इन परीक्षणों की सलाह दी जा सकती है। इन लक्षणों से वे जानकारियां मिलती हैं, जो सामान्य एक्स-रे से नहीं मिलती। 
नर्व कंडक्शन का अध्ययन या इलेक्ट्रोमायोग्राफी(ईएमजी) 

उपचार

सही इलाज से अधिकतर लोगों को पिंच्ड नर्व से राहत मिल सकती है।

आराम लेनाः सबसे अधिक सलाह प्रभावित भाग को आराम देने की दी जाती है। डॉक्टर आपको ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दे सकते हैं जिनसे कंप्रेशन हो सकता है या बढ सकता है। 

स्प्लिंट या ब्रेशः प्रभावित भाग को हिलने-डुलने से बचाने के लिए स्प्लिंट या ब्रेश की आवश्यकता पड़ सकती है। जैसे-अगर रोगी को कार्पेल टनेल सिंड्रोम है, तो उसे डॉक्टर स्प्लिंट या ब्रश लगाने की सलाह दे सकते हैं। शारीरिक व्यायाम की पद्धतिः फिजियोथेरेपी नर्व से दबाव हटाने के क्रम में प्रभावित भाग की मांसपेशियों को खींचने या मजबूत बनाने में सहायता करता है। फिजियोथेरेपिस्ट आपको इस व्यायाम का प्रशिक्षण और दिशानिर्देश दे सकता है। दवाएं-नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं जैसे-आइब्यूप्रोफेन, मेफेनेमिक एसिड और नैप्रोक्सेन से दर्द से राहत मिलती है। अगर आपको तेज दर्द औऱ सूजन है तो डॉक्टर अधिक असरदार दर्द निवारकों या प्रभावित नर्व में कॉर्टिकोस्टेरॉयड हार्मोन के इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं। 

सर्जरीःयदि कंप्रेस्ड नर्व के लक्षण परंपरागत इलाज के बावजूद कई सप्ताह या कई महीनों तक रहे तो दर्द से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। शल्यक्रिया किस प्रकार की होना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि 

दर्द कहां हो रहा है

ओटीसी दर्द निवारकः साधारण दर्द निवारक जैसे-पारासिटामोल, एस्पिरीन, आइब्यूप्रोफेन आदि दर्द से मुक्ति दिला सकते हैं।
वैकल्पिक चिकित्सा

होमियोपैथ दवाएं जैसे-रस टॉक्स, अर्निका आदि, पिंच्ड नर्व के कारण हो रहे दर्द से राहत दिलाती है। हर्बल चाय में सेंट जॉन्स वर्ट, सिबेरियन गिन्सेंग और स्कलकैप की बराबर मात्रा देकर पीने से पिंच्ड नर्व के दर्द में आराम मिलता है। 
एक्यूपंक्चर, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन डिवाइसेज(टीईएनएस), हिप्नोसिस, शियास्टु औऱ बायोफीडबैक कंप्रेस्ड नर्व से राहत दिलाता है। 
योगा, मेडीटेशन औऱ रिलैक्सेशन तकनीक से पिंच्ड नर्व और उसके दर्द से आराम मिलता है। 
घरेलू उपचार 
आप दर्द वाली जगह पर गर्म पानी के बोतल या बर्फ, जो आपको आरामदाय लगे.