हाथ - पैरोँ में दर्द , तो दिल की बीमारी

हाथ – पैरोँ में दर्द , तो दिल की बीमारी

हाथ – पैरोँ में दर्द , तो दिल की बीमारी

अगर आपका यह मानना है कि हाथ-पैरों के दर्द का हार्ट से कोई रिश्ता नहीं है तो अपनी सोच बदल लें, क्योंकि न सिर्फ वक्त के साथ दिल की बीमारियों के लक्षणों में बदलाव आ रहा है, बल्कि इलाज के नए तरीके ढूंढने की भी जरूरत महसूस की जा रही है।

सोनीपत के रहने वाले 50 साल के सुरेंद्र इसका एक उदाहरण हैं। इंटरवेंशनल कार्डियॉलजिस्ट ने उनके निचले अंगों में गंभीर दर्द का ऑपरेशन हाल ही में ट्रांसरेडियल (कलाई के माध्यम से) तकनीक से किया है। यह सर्जरी करने वाले महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल के कार्डियॉलजिस्ट डॉ. बी. बी. चानना ने बताया कि मरीज की आर्टरी ब्लॉक हो गई थी, जिसके चलते उसके ऊपरी अंगों (अपर लिम) की नसें बहुत पतली हो गई थीं। इसके चलते उसके शरीर के निचले अंगों में (लोअर लिम) में असहनीय दर्द होता था।

करीब एक साल से सुरेंद्र चल फिर नहीं पा रहे थे। इतना ही नहीं, रक्त प्रवाह ठीक न होने की वजह से उनके पैरों के अंगूठे में बदलाव भी आने लगा था, जिससे आगे चलकर उन्हें काटने की नौबत भी आ सकती थी। जांच में पता लगा कि शरीर के निचले हिस्सों को ब्लड सप्लाई करने वाली एब्डॉमिनल एओट्रा (मुख्य रक्त नलिका) में ब्लॉकेज है। डॉ. चानना कहते हैं, एब्डॉमिनल एओट्रा में ब्लॉकेज का मामला काफी रेयर होता है और इसके इलाज के लिए आमतौर पर बड़ी सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें मरीज के स्वस्थ होने में काफी लंबा समय लगता है।

उन्होंने बताया कि हमने इसके लिए ट्रांसरेडियल तकनीक अपनाई और ब्लॉकेज को खोलने के लिए कलाई के जरिए 40×14 मिमी का एक स्टेंट डाला, जबकि आमतौर पर कलाई के जरिए 2.3 मिमी से 3.5 मिमी तक का स्टेंट ही डाला जाता है। सुरेंद्र के मामले में यह तकनीक पूरी तरह से सफल रही। इससे उसकी स्थिति में तुरंत सुधार आया। वह दूसरे दिन से ही अपने रुटीन काम करने लगा और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई।