नकसीर फूटना

नकसीर फूटना (नाक से खून निकलना) (Epistiaxix)

नकसीर फूटना (नाक से खून निकलना) (Epistiaxix)

 

परिचय: वैसे नाक से खून निकलना अपने आप में कोई रोग नहीं है लेकिन जब यह बार-बार होता है तो यह एक रोग बन जाता है जिसका उपचार कराना बहुत ही आवश्यक है। इस रोग के हो जाने के कारण रोगी व्यक्ति की नाक से खून निकलने लगता है। कभी-कभी तो नाक से खून निकलने के कारण यह खून ग्रासनली से होता हुआ पेट में चला जाता है।

 

नकसीर फूटने के कारण-

 

किसी दुर्घटना के कारण अचानक नाक पर चोट लग जाने की वजह से नाक से खून निकलने लगता है।

नाक में किसी रोग के हो जाने के कारण जब व्यक्ति अपनी नाक को बार-बार कुरेदता है तो उसकी नाक से खून निकलने लगता है जिसके कारण उस व्यक्ति को नकसीर फूटने का रोग हो जाता है।

नाक के पिछले भाग की एक ग्रंथि में सूजन हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्ति हो जाता है।

प्लेथोरा रोग अर्थात शरीर के रक्तकोषों में रक्ताधिक्य हो जाने के कारण भी यह रोग हो जाता है।

हैमोफीलिया या परप्यूरा रोग हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।

नाक में किसी तरह का संक्रमण हो जाने के कारण भी नकसीर फूटने का रोग हो जाता है।

नाक में फुंसियां हो जाने के कारण भी नकसीर फूटने का रोग हो सकता है।

पेट में लगातार कब्ज बनने के कारण भी नाक से खून आने का रोग हो सकता है।

नाक को झटके के साथ साफ करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

डिस्क्रेस्या, उच्च रक्तचाप रोग के कारण भी नाक से खून निकलने लगता है।

 

नकसीर फूटने का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-

 

जब रोगी व्यक्ति की नाक से खून निकलने लगे तो उस समय रोगी व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी की धार देनी चाहिए तथा रोगी को गीली मिट्टी सुंघाएं। इससे रोगी की नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।

रोगी व्यक्ति के सिर तथा मस्तिष्क पर ठंडे जल में भिगोया कपड़ा रखना चाहिए ताकि उसकी नाक से खून निकलना बंद हो जाए।

रोगी के दोनों हाथों में बर्फ के टुकड़े रखने चाहिए तथा रोगी के नाक पर बर्फ का ठंडा लपेट करना चाहिए तथा बर्फ के टुकड़े उसके सिर के नीचे सिराहने में रखने चाहिए।

जब रोगी की नाक से खून निकलने लगे तो उसके शरीर के कपड़े उतार देने चाहिए ताकि कपड़ों पर खून न गिर सके। रोगी व्यक्ति को मुंह से सांस लेनी चाहिए। इसके फलस्वरूप रोगी की नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए।

रोगी व्यक्ति के हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगुली के बीच की नस को दबाने से भी नाक से खून निकलना बंद हो जाता है। रोगी व्यक्ति की नाक पर प्रतिदिन सरसों का तेल लगाना चाहिए इससे नकसीर फूटने का रोग ठीक हो जाता है।

रोगी की नाक को अच्छी तरह से साफ करके उसकी नाक पर बर्फ के टुकड़े लगाने चाहिए ताकि यह रोग ठीक हो सके।

ठंडे पानी में नींबू का रस मिलाकर नाक से अन्दर खींचने से भी नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।

जब नाक से अधिक खून निकलने लगे तो सबसे पहले रोगी व्यक्ति को किसी ठंडी जगह पर लिटाना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को गर्दन पीछे की ओर झुकानी चाहिए। फिर गर्दन के पिछले भाग के नीचे ठंडे पानी की पट्टी या बर्फ की थैली रख देनी चाहिए और पैरों में सूखी गरम पट्टी बांधनी चाहिए। इसके बाद रोगी के पैरों को 5 मिनट तक गर्म पानी से धोना चाहिए। इस प्रकार के उपचार से नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।

यदि किसी व्यक्ति की नाक से बार-बार से खून निकल रहा हो तो सबसे पहले रोगी व्यक्ति को सुबह और शाम के समय में उदरस्नान करना चाहिए तथा अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी रखनी चाहिए।

यदि सिर पर चोट लगने के कारण नाक से खून निकल रहा हो तो सबसे पहले नाक से खून निकलने को रोकना चाहिए और फिर रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए।

पीली बोतल का सूर्यतप्त जल 100 मिलीलीटर, नीली बोतल का सूर्यतप्त जल 50 मिलीलीटर और हरी बोतल का सूर्यतप्त जल 50 मिलीलीटर को आपस में मिला लें। फिर इसे लगभग 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन दिन में 5 बार सेवन करने से रोगी का यह रोग ठीक हो जाता है।

हरी बोतल के सूर्यतप्त जल में कपड़े की बत्ती को तर करके उसे नाक के नथुनों में रखने से या फिर उस जल का केवल नस्य लेने से भी नाक से बार-बार खून निकलना बंद हो जाता है। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।